मुंबई
महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया मोड़ तब आया जब शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे, बीस वर्षों के लंबे अंतराल के बाद एक मंच पर एकसाथ नजर आए। वर्ली में आयोजित इस संयुक्त रैली को राजनीतिक विश्लेषक ‘ऐतिहासिक क्षण’ बता रहे हैं, जो आने वाले चुनावों में समीकरण बदल सकता है।

"हमारी ताकत एकता में है" - उद्धव ठाकरे
रैली को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा, “हमारी ताकत हमारी एकता में है। जब भी संकट आता है, हम सब एकजुट होते हैं, लेकिन जैसे ही संकट टलता है, निजी स्वार्थ हावी हो जाते हैं। इस बार ऐसा नहीं होना चाहिए।”
उद्धव ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, “वे हमसे पूछते हैं कि बीएमसी में रहते हुए हमने मराठी लोगों के लिए क्या किया। अब हम उनसे पूछते हैं कि 11 साल की सत्ता में आपने क्या किया? मुंबई से व्यवसाय और संस्थान गुजरात ले गए। हीरा कारोबार पहले ही वहां चला गया है। ये महाराष्ट्र की रीढ़ तोड़ने की कोशिश है।” उन्होंने भाजपा की ‘एक संविधान, एक प्रतीक, एक प्रधानमंत्री’ नीति पर भी कटाक्ष किया और कहा, “अगर एक प्रतीक चाहिए तो वो तिरंगा है, भाजपा का झंडा नहीं, जो बर्तन साफ करने के कपड़े जैसा है।”
"एक ही डीएनए" - शिवसेना और मनसे
शिवसेना (UBT) नेता आनंद दुबे ने कहा, “दोनों भाइयों ने यह दिखा दिया है कि वे बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा को आगे बढ़ाने वाले असली वारिस हैं। इस एकता का असर आगामी चुनावों में साफ दिखाई देगा।” उन्होंने कहा कि शिवसेना (UBT) और मनसे का ‘डीएनए’ एक है।

"जो बालासाहेब नहीं कर सके, वह फडणवीस ने कर दिखाया" - प्रियंका चतुर्वेदी
शिवसेना (UBT) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने इस क्षण को ‘ऐतिहासिक’ बताते हुए कहा, “राज ठाकरे ने सही कहा कि जो बालासाहेब नहीं कर सके, वह देवेंद्र फडणवीस ने कर दिखाया। यह दिखाता है कि अब यह साथ लंबे समय तक चलेगा। जनता की उत्सुकता यह दर्शाती है कि वे भी दोनों को साथ देखना चाहती थी।”
राजनीतिक गलियारों में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि ठाकरे बंधुओं का यह गठबंधन महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है।
